Thursday, January 17, 2013

उषा गांगुली निर्देशित रंगकर्मी का नया नाटक ‘हम मुख्तारा’



प्रसिद्ध  नाट्य निर्देशिका उषा गांगुली के निर्देेशन में तैयार रंगकर्मी के नए हिंदी नाटक ‘हम मुख्तारा’ का मंचन आगामी 23 जनवरी को रवींद्र सदन प्रेक्षागृह में शाम सात बजे होगा। यह नाटक पाकिस्तान की एक महिला मुख्तारा माई के साथ हुए सामूहिक बलात्कार और इंसाफ के लिए लड़ी जा रही उसके संघर्ष पर केंद्रित है। रंगकर्मी के इस नए नाटक में कुल 31 कलाकार हैं। जिनमें 17 महिलाएं हैं। उषा गांगुली ने एक प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों को  बताया कि भारत की तरह पाकिस्तान में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर महिलाओं के साथ जो हो रहा है उसे ही इस नाटक में केंद्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में भी इस नाटक का मंचन किया जाएगा।

Monday, January 14, 2013

बरफी और पान सिंह तोमर की बल्ले -बल्ले


    19वें सालाना कलर्स स्क्रीन अवार्ड में पैनी, प्रयोगधर्मी और लीक से हटकर फिल्मों को तरजीह देने की  पुरस्कारों की परंपरा इस बार भी कायम रही और ज्यादातर शीर्ष पुरस्कार पान सिंह तोमर, बर्फी और कहानी की झोली में गए। पान सिंह तोमर सर्वश्रेष्ठ फिल्म आंकी गई जबकि सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार बर्फी के अनुराग बसु को मिला।
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार पान सिंह तोमर में अपनी भूमिका के लिए इरफान और बर्फी में शानदार अभिनय के लिए रणबीर को साझा तौर पर दिया गया। विद्या बालन का दबदबा कायम रहा और उन्हें लगातार चौथी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से नवाजा गया। इस बार यह पुरस्कार उन्हें कहानी में अपने लापता पति की तलाश कर रही एक गर्भवती महिला के किरदार के लिए दिया गया।

सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता का पुरस्कार तलाश में अपनी भूमिका के लिए नवाजुद्दीन सिद्दीकी को दिया गया जबकि डाली अहलूवालिया को विकी डोनर में उनके किरदार के लिए सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेत्री का पुरस्कार दिया गया। नकारात्मक किरदार के लिए गैंग्स आफ वासेपुर के तिगमांसु धूलिया को सर्वश्रेष्ठ कलाकार के पुरस्कार से नवाजा गया। अन्नू कपूर (विकी डोनर) और अभिषेक बच्चन (बोल बचन) को संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ हास्य कलाकार के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

Sunday, January 13, 2013

हजारों लोग गुलाबी मौसम में ठिठुरने के लिए मजबूर


  रंजीत लुधियानवी
कोलकाता,  महानगर कोलकाता,हावड़ा समेत पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में बीते कुछ दिनों से तापमान पांच डिग्री से लेकर 10 डिग्री सेल्सीयस के बीच घुम रहा है। कहीं पारा गिर कर 10 साल पुराने रिकार्ड तोड़ रहा है तो कहीं 22 साल पुराने रिकार्ड टूट रहे हैं। कभी-कभार तापमान में कुछ वृद्धि होती है तो गुलाबी मौसम में लोग पिकनिक के लिए निकल पड़ते हैं। मौज-मस्ती करने वाले स्वेटर, मफलर समेत तमाम गर्म कपड़ों और सूट-बूट में लैस होते हैं। वहीं महानगर में कुछ लोग ऐसे भी हैं कि पारा गिरते ही उनकी हालत बिगड़ जाती है। आनंद मनाने वालों का गुलाबी मौसम उनके लिए काली अंधेरी और ठिठुरती हुई रात में बदल जाता है। अकसर तन ढकने में नाकाम लोग किसी तरह कड़ाके की सर्दी में जीवन यापन करते हैं।
मौसम की मार झेलने वाले ऐसे गरीब और बेसहारा लोगों  में कोई कागज बिनता है तो कोई ठेला-रिक्शा  चलाता है। जबकि कुछ लोग महज भीख मांग कर ही गुजारा करते हैं। ऐसे  ज्यादातर लोगों को मतदान का भी अधिकार नहीं है। उनके पास राशन कार्ड भी नहीं है। तापमान में गिरावट की खबर सूनकर जहां लोगों में खुशी की लहर दौड़ जाती है वहीं इनके लिए बोरे में ठिठुरन भरी सर्दी में रात गुजारने की सोच कर रगों में सिहरन दौड़ जाती है। इसके बावजूद आम लोग जहां सर्दी-खांसी बुखार में छुट््टी लेकर कंबल में दुबके रहते हैं वहीं ये लोग बीमारी में भी काम पर निकलते हैं। भले ही शरीर साथ न तो कहीं फुटपाथ का सहारा लेकर सुस्ता लेते हैं।
महानगर कोलकाता मेंफुटपाथ पर रहने वाले  लोगों को  दूसरे दर्जे का नागरिक कहा जा सकता है क्योंकि इनके पास सुख-सुविधा का कोई सामान मौजूद नहीं है। यहां  के नागरिकों में  90 फीसद लोगों  को सर्दी में महज राज्य सरकार और गैर सरकारी संस्थाओं का ही सहारा रहता है। इसका कारण यह है वहां से उन्हें कुछ राहत की सामग्री मिल जाती है। कई सभा-संगठनों की ओर से हर साल कंबल और गर्म कपड़ा वितरण समारोह का आयोजन किया जाता है। इसमें स्वेटर से लेकर चादर तक बांटी जाती है।
हावड़ा स्टेशन, सियालदह स्टेशन, बड़ाबाजार, पोद्दार कोर्ट, बीबी गांगुली स्ट्रीट, धर्मतला ट्राम डिपो समेत महानगर के विभिन्न इलाकों में फुटपाथ पर ऐसे लोगों को देखा जा सकता है। कुहासे ढंके रास्तों पर सड़क के किनारे दोनों ओर काले फटे बोरे या प्लास्टिक की आड़ में ऐसे परिवार निवास करते हैं। राज्य में सबसे ज्यादा फुटपाथ पर रहने वाले कोलकाता की सड़कों पर ही रहते हैं। गैर सकारी सूत्रों से मिले आंकड़ों के मुताबिक यहां 10-12 हजार लोग फुटपाथ पर गुजर-बसर करते हैं। हर साल दर्जनों संगठनों की ओर से कंबल, स्वेटर और गर्म कपड़े गरीब और जरुरतमंद लोगों में बांटे जाते हैं। लेकिन फुटपाथ पर रहने वाले ज्यादातर लोगों के पास फ टे कंबल और बोरे ही जीवन यापन का सहारा होते हैं। स्ट्रैंड रोड पर एक महिला अपने शराबी पति से झगड़ रही थी क्योंकि उसने नए गर्म कपड़े कुछ रुपयों के लालच में बेच दिए थे और रुपयों की शराब लाकर पी गया था। ऐसे कपड़े ज्यादातर नशे की लत में बेच दिए जाते हैं। रविवार धर्मतला ट्राम डिपो में एक महिला और दामाद की इसी लिए जमकर झड़प हुई।
बीबी गांगुली स्ट्रीट पर हाथ रिक्शा चालक अजीम भाई ने बताया कि पहले तो किसी तरह जाड़ा आसानी से कट जाता था। लेकिन इस साल हद हो गई है। शनिवार तो कुछ हद तक राहत थी। इसी तरह शबीना का भी कहना था कि इस साल तो सर्दी गुजर ही नहीं रही है। पता नहीं ऐसा माहौल कब तक रहेगा। हाल तक कोलकाता में सर्दी से ज्यादा परेशानी नहीं होती थी।
फुटपाथ वालों के लिए प्रशासन की ओर से भी राहत प्रदान की जाती है। लेकिन प्रशासनिक नियमों के मुताबिक किसी बीमार और असहाय व्यक्ति को पहले कोलकाता पुलिस की एनफोर्समेंट ब्रांच के तहत शाखा में भेजा जाता है। उनका प्राथमिक इलाज करने के बाद सरकारी नियमानुसार न्यायधीश के सामने पेश करना पड़ता है। अदालत के निर्देश के बाद ही बीमार फुटपाथी को सरकारी होम या आश्रयस्थल में भेजा जाता है। हालांकि कई जगह पुलिस ने शार्टकट रास्ता भी अपना रखा और थाने के साथ स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ तालमेल कायम है। थानों से सीधे मरीज को उनके होम में भेज दियाजाता है। संलाप, नवदिशा समेत कई इस तरह की संस्थाएं पुलिस के साथ मिलकर काम कर रही हैं।
राज्य की समाज कल्याण विभाग की मंत्री सावित्री मित्र का कहना है कि फुटपाथ पर रहने वाले और गरीब लोगों के लिए राज्य में कुल मिलाकर 27 होम बनाए गए हैं। यहां रास्ते के किनारे रहने वालों के इलाज और रहने की व्यवस्था की गई है।

बिग बॉस-6 की विजेता बनीं उर्वशी ढोलकिया




 टीवी अभिनेत्री उर्वशी ढोलकिया रियलिटी शो बिग बॉस के छठे संस्करण की विजेता बन गयीं. उन्होंने अपने नजदीकी प्रतियोगी इमाम सिद्दीकी को हराकर शो के विजेता का खिताब जीत लिया.
उर्वशी के जीतने के साथ बिग बॉस में लगातार यह तीसरा मौका है जब टीवी की एक ‘बहू’ ने यह शो जीता. छोटे पर्दे की ‘वैंप’ के रुप में पहचानी जाने वाली उर्वशी ने कम अंतर से ही शो का खिताब जीता.
इससे पहले श्वेता तिवारी और जूही परमार ने भी बिग बॉस के विजेता का खिताब जीता था. उर्वशी को विजेता के रुप में 50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिली है. हालांकि कलर्स चैनल ने दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए इमाम सिद्दीकी को भी दस लाख रुपये का इनाम दिया. इमाम को शो के दौरान भी पांच लाख रुपये दिये गये थे.
इस रियलिटी शो में 19 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया जिन्हें 97 दिनों तक कैमरों से घिरे एक घर में साथ रहना था.

Friday, January 11, 2013

रेल किराया तो बढ़ा दिया यात्रियों की सुध कौन लेगा?


 

रंजीत लुधियानवी
कोलकाता, 10 जनवरी । रेल मंत्री पवन बंसल ने रेल किराए में वृद्धि का एलान कर दिया है। लगभग 20 फीसद की  किराया वृद्धि के बाद कहा जा रहा है कि 10 साल बाद यह किराया बढ़ा है, इसके लिए रेलवे मजबूर था। किराया वृद्धि किए जाने पर लोगों में एक राय नहीं है कुछ लोगों का कहना है कि एक साथ इतना अधिक किराया बढ़ाया जाना किसी भी तरीके से उचित नहीं कहा जा सकता। दस साल तक किराया नहीं बढ़ा तो इसके लिए आम लोग नहीं केंद्र सरकार ही जिम्मेवार है जिसने राजनीतिक कारणों से ऐसा होने दिया। जबकि दूसरे कुछ लोगों का कहना है कि जब चावल से लेकर डीजल और रसोई गैस से लेकर बस किराया तो बढ़ता जा रहा है। ऐसे में रेलवे ने कुछ गलत नहीं किया है। हालांकि एक बात पर सारे लोग सहमत हैं कि  माल भाड़े, खान-पान के बाद किराए में भी रेलवे ने वृद्धि कर दी है लेकिन क्या यात्रियों की समस्याओं के बारे में भी रेल प्रबंधन कभी गंभीर होगा? आजादी के 150 साल बाद भी रेलगाड़ियां समय पर बहुत कम ही चलती हैं। दिसंबर में तो 34 घंटे देरी से चलकर एक ट्रेन ने रिकार्ड कायम किया है, जबकि तीन- चार घंटे से लेकर चौबीस घंटे देरी से चलना तो एक सामान्य बात हो गई है।
रेल किराया बढ़ने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एक गृहिणी मंजू सिंह ने कहा कि हावड़ा- अमृतसर मेल (3005 अप-3006 डाउन) शायद ही कभी समय पर चलती हो। जबकि जाड़े के दिनों मे तो यह ट्रेन 12 से लेकर 24 घंटे देरी से चलती है। इसके अलावा कालका मेल, हिमगिरी एक्सप्रेस की हालत भी कम खराब नहीं है। अचानक रेलगाड़ी रद्द कर दी जाती है। इसके बाद फरमान जारी किया जाता है कि यात्रियों को पूरा किराया वापस मिल जाएगा लेकिन चार महीने पहले टिकट आरक्षित कराने वाले यात्रियों को न तो चार महीने का ब्याज मिलता है और न ही वैकल्पिक ट्रेन में आरक्षण की व्यवस्था की जाती है। जबकि होना तो यह चाहिए कि ट्रेन रद्द किए जाने पर उस हफ्ते किसी भी ट्रेन में यात्री अपना टिकट रिजर्व कर सके।
इससे पहले ही रेलवे स्टेशन पर या ट्रेन के भीतर यात्रियों को मिलने वाला नाश्ता व भोजन महंगा कर दिया गया था। अमृतसर मेल में 65 रुपए में मिलने वाला भोजन 90 रुपए और पांच रुपए में मिलने वाली चाय सात रुपए की कर दी गई। कीमत बढ़ने के बाद तीन रुपए में मिलने वाली रोटी पांच रुपए, 20 रुपए में मिलने वाला दाल-चावल 23 रुपए और 70 रुपए में मिलने वाली चिकन बिरयानी 84 रुपए की हो गई है। गोविंद रावत के मुताबिक रेलवे ने पैंट्री कार में मिलने वाले खाने के दाम तो बढ़ा दिए लेकिन गुणवत्ता के मामले में अभी भी कुछ सुधार नहीं हुआ है।
कई यात्रियों का कहना है कि सुरक्षा के मामले में देश भर में अभी तक रूट रिले इंटरलाकिंग सिस्टम चालू नहीं हो सका है। दुर्घटना रोकने के लिए एंटी कालिजन डिवाइस नहीं हैं। ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम की बातें सालों से चल रही हैं लेकिन कुछ नहीं हुआ है। रेलवे के विकास का जिक्र करते हुए एक यात्री ने बताया कि 1969 में देश में पहली राजधानी एक्सप्रेस नई दिल्ली से हावड़ा के बीच चली थी। उस समय रोलिंग स्टाक पुराने थे, इंजन भी कम शक्तिशाली थे। उस समय 1450 किलोमीटर की दूरी तय करने में इस गाड़ी को 17 घंटे 10 मिनट लगते थे। अब इस गाड़ी में जर्मन तकनीक वाले डिब्बे हैं जो 150 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ सकते हैं। पांच हजार हार्स पावर वाले शक्तिशाली बिजली के इंजन इसे खींचते हैं तब भी इसे यह दूरी तय करने में 16 घंटे 55 मिनट लगते हैं। सालों बाद इतने तामझाम के बाद  महज 15 मिनट की बचत हुई है।
रेल मंत्री के एलान पर नाराजगी प्रकट करते हुए मंजीत कौर ने कहा कि मंत्री ने अचानक किराया वृद्धि का एलान कर दिया जबकि रेलवे बजट आने वाला है। पहले किसी भी तरह का एलान बजट में किया जाता था। अब केंद्रीय बजट की तरह की रेलवे बजट भी अप्रासंगिक हो गया है। ऐसे में बजट पेश करने का क्या औचित्य है? गठजोड़ की सरकार ने किसी सहयोगी से किराया बढ़ाने के बारे में विचार-विमर्श किया,देशके  लोगों को विश्वास में लिया? एक अल्पमत की सरकार मनमाने फैसले कैसे कर सकती है? इसी तरह रेणू वर्मा ने कहा कि रेलवे में चोरी-लूट और डकैती आमतौर पर होती रहती है, इसलिए जब तक गंतव्य स्थल पर नहीं पहुंच जाते खुद और घर वाले दहशत में ही रहते हैं। क्या रेलवे इस बारे में कुछ करेगा कि लोग सुरक्षित अपने स्टेशन तक पहुंच सकें।
हावड़ा रेलवे स्टेशन के गोदाम में बीते दो दिनों से अपना सामान तलाशते एक व्यक्ति ने बताया कि यहां कुछ पता ही नहीं चल रहा है कि सामान कब पहुंचेगा। एक कर्मचारी ने बताया कि रेलगाड़ियां देरी सेचल रही हैं इसलिए हो सकता है कि आपका सामान दूसरे दिन वाली ट्रेन में चढ़ा दिया गया हो। इसलिए एक दिन और यहां देख लें , फिलहाल कुछ बताना संभव नहीं है। इसी तरह कई लोग सामान की तलाश में परेशान रहते हैं। लेकिन यहां किसी के पास सटीक जानकारी नहीं मिलती कि आपका सामान कब पहुंचने वाला है।

Monday, January 7, 2013

महिलाओं पर बढ़ा पतियों का अत्याचार


FILE
राष्ट्रीय राजधानी में महिलाएं केवल घर के बाहर ही नहीं बल्कि घर में भी असुरिक्षत हैं। वर्ष 2011 में पतियों द्वारा महिलाओं पर अत्याचार के करीब डेढ़ हजार मामले दर्ज किए गए।

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के खिलाफ उनके परिवार के किसी सदस्य द्वारा हिंसा के मामलों में बढोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2011 में राजधानी में इस तरह के 1498 मामले दर्ज हुए जबकि 2010 और 2009 में यह आंकड़ा क्रमश: 1273 और 1177 रहा था।

महानगरों में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों के आंकड़े से यह खुलासा हुआ कि जनवरी से दिसंबर 2011 तक हैदराबाद में इस तरह के 1355,कोलकाता में 557, बेंगलुरू में 458, मुंबई में 393 और चेन्नई में 229 मामले दर्ज किए गए।

वर्ष 2010 में पति या किसी रिश्तेदार द्वारा अत्याचार के संबंध में हैदराबाद में 1420, कोलकाता में 400, बेंगलुरू में 398, मुंबई में 312 और चेन्नई में 125 मामले दर्ज हुए।

गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय अपराध आंकड़े ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2009 में इस तरह के अपराध के हैदराबाद में 1363, मुंबई में 434, कोलकाता में 411, बेंगलुरू में 367 और चेन्नई में 154 मामले दर्ज हुए।

इसके अलावा वर्ष 2011 में छेड़छाड़ के दिल्ली में 556 मामले, मुंबई में 553 और कोलकाता में 254 मामले दर्ज हुए, वहीं बेंगलुरू में इस तरह के 250 मामले, हैदराबाद में 157 और चेन्नई में 73 मामले दर्ज किए गए।

जनवरी से दिसंबर 2011 तक यौन उत्पीड़न के चेन्नई में 162, दिल्ली में 149, कोलकाता में 144, चेन्नई 121, हैदराबाद में 93 और बेंगलुरू में 40 मामले दर्ज किए गए। (भाषा)